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मंगलवार, 30 जून 2026

छात्र जगत

दिल्ली विष्वविद्यालय का अनुमति नोटिस: असहमति का गला घोंटती तानाषाही

- महेन्द्र

    दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) का प्रशासन एक ऐसा नोटिस जारी कर चुका है जिसमें प्रदर्शन, सभा या कोई कार्यक्रम आयोजित करने से पहले 72 घंटे का पूर्वानुमोदन अनिवार्य कर दिया गया है। 23 मार्च 2026 को प्राक्टर कार्यालय द्वारा जारी यह नोटिस ‘कैंपस व्यवस्था’ के नाम पर लिया गया, लेकिन वास्तव में यह छात्रों और शिक्षकों की असहमति को दबाने की सुनियोजित साजिश है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को खत्म कर देता है। यह नोटिस बिना स्पष्ट अपील प्रक्रिया के मनमानी को बढ़ावा देता है, जो लोकतंत्र-विरोधी है।
दिल्ली के छात्र संगठनों का मजदूर आंदोलन के समर्थन में एकजुटता बयान

    देश भर में चल रहे मजदूरों के आंदोलन के दमन और बदनाम करने की कार्यवाही का हम पुरजोर विरोध करते हैं।

सोमवार, 29 जून 2026

वी आई टी भोपाल में खाने और पानी की शिकायत पर छात्रों का दमन
महेश

    मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित वेल्लोर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (VIT) के भोपाल कैंपस में 25 नवंबर की रात के लगभग 10 बजे कुछ छात्र मेस के खराब खाने और गंदे पानी की शिकायत लेकर अपने असिस्टेंट प्रोफेसर प्रशांत कुमार पांडे के पास पहुंचे थे। उन्हें उम्मीद थी कि उनकी समस्या सुनी जाएगी। लेकिन जो हुआ वह किसी ने सोचा भी नहीं था। प्रोफेसर ने छात्रों की शिकायत सुनने के बजाय आपा खो दिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। छात्रों के बालों को पकड़कर घसीटा गया, उन्हें थप्पड़ मारे गए और जलील किया गया। यही रात में छात्रों के आक्रोश का कारण बना।
नस्लीय हिंसा का शिकार एंजेल चकमा
सुरभि


        एंजेल चकमा, त्रिपुरा का एक छात्र जो अपनी पढ़ाई करने देहरादून, उत्तराखंड आया था। उसके माता-पिता ने अपने बेटे को सुंदर भविष्य की उम्मीदों के साथ देहरादून भेजा था। ना तो एंजेल चकमा अपनी पढ़ाई पूरी कर पाए और न ही उनके माता-पिता का उनके सुंदर भविष्य का सपना ही पूरा हो पाया। नस्लीय हिंसा ने उत्तराखंड में उनकी जान ले ली। अपने खिलाफ दी गई नस्लीय गालियों का विरोध करने की सजा एंजेल को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। इस हमले में उनके भाई भी घायल हुए थे। एंजेल चकमा की हत्या ने एक बार फिर नस्लीय घृणा और हिंसा के ज़ख्म को ताज़ा कर दिया है।
बनारस हिन्दू विष्वविद्यालय में छात्रों और सुरक्षा कर्मियों के बीच हिंसक झड़प
महेश


    2 दिसंबर 2025 की आधी रात बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के बिरला छात्रावास परिसर में अचानक खून-खराबे का मंजर बन गया। सब कुछ शुरू हुआ एक छात्र के वाहन से टकराव से। राजाराम छात्रावास (हाॅस्टल) के पास एक बाइक दुर्घटना में घायल छात्र अन्य छात्रों के साथ शिकायत दर्ज कराने प्राॅक्टोरियल बोर्ड आफिस पहुंचा। लेकिन वहां बातचीत तेज बहस में बदल गई, और जल्द ही छात्रों और प्राॅक्टोरियल टीम-सुरक्षा कर्मियों के बीच भयंकर विवाद शुरू हो गया। सुरक्षा कर्मियों ने कुछ छात्र को गिरफ्तार कर लिया। इससे छात्र भड़क गए तथा अन्य छात्र भी छात्रावास से आ गए। कुछ देर बाद छात्रों और सुरक्षा कर्मियों में भारी पथराव हुआ। घंटों तक यह बवाल चलता रहा। जिसमें दर्जनों छात्र, सुरक्षाकर्मी और पुलिसकर्मी घायल हुए। कुछ की हालत गंभीर हो गई। बीएचयू प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही से कैंपस युद्ध का मैदान बन गया।
छात्र जगत
पंजाब विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन जीत के साथ समाप्त
महेश


    केन्द्र सरकार ने पंजाब विश्वविद्यालय के सीनेट को भंग करने के इरादे से 28 अक्टूबर को एक ‘नोटिफिकेशन’ जारी किया था। इसके तहत सीनेट-सिण्डिकेट में चुनाव की प्रक्रिया को रद्द करके इसे पूरी तरह नामांकित पदों वाली बना दिये जाने का प्रावधान था। यही नहीं इसके सदस्यों की संख्या को 91 से कम करके 31 कर दिया गया था। केन्द्र सरकार ने इसके बाबत पहले भी कई कोशिशें की हैं लेकिन छात्र समुदाय और जनता के दबाव के चलते फासीवादी संघ-भाजपा सरकार इसमें सफल नहीं हो पायी।

गुरुवार, 4 दिसंबर 2025



उत्तराखंड के 25 साल

शिक्षा और रोजगार की बुरी स्थिति

-महेश

    9 नवंबर 2025 को उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के 25 साल पूरे हो जाएंगे। 25 वें साल में प्रवेश करने पर उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने इसे रजत जयंती वर्ष के रूप में मनाया। राज्य की धामी सरकार ने इस अवसर पर उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित करवाए। उत्तराखंड राज्य बनने की प्रमुख वजहों में शिक्षा और रोजगार भी प्राथमिक सवाल बने रहे। राज्य बनने के बाद यहां के निवासियों की आकांक्षाओं के अनुरूप राज्य का निर्माण नहीं हुआ और सत्ता में बारी-बारी से बैठी भाजपा-कांग्रेस ने मलाई खाई। उत्तराखंड के मामले में बात करने के लिए तो बहुत कुछ है परंतु यहां पर आगे हम शिक्षा और रोजगार के मामले में कुछ हालातों को रखेंगे।

शनिवार, 25 नवंबर 2023

 आत्महत्या नहीं, यह संस्थानिक हत्या है       

                                                                                                         महेश                    

एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) सिलचर, असम में बीते 15 सितंबर की शाम को 20 वर्षीय छात्र कोज बुकर ने संस्थान के छात्रावास-7 के अपने कमरे में आत्महत्या कर ली। कोज बुकर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में तृतीय वर्ष के छात्र थे और अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले थे।

कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण एनआईटी सिलचर ने 2021 में पहले सेमेस्टर की पढ़ाई ऑनलाइन आयोजित की थी। लॉकडाउन में ग्रामीण इलाके से होने के कारण कोज बुकर को इंटरनेट की सुविधा कम मिली। वह कक्षाओं में उपस्थित भी नहीं हो सके। कम उपस्थिति के कारण अधिकारियों ने उन पर परीक्षा में 6 बैकलॉग लगा दिए। अभी कोज को तीसरे वर्ष के पांचवें सेमेस्टर की कक्षाओं में जाने के लिए पंजीकरण की अनुमति नहीं दी गई। कुछ दिन पहले कॉलेज के डीन ने अन्य छात्रों के सामने कोज बुकर का काफी अपमान किया था।

गुरुवार, 27 अप्रैल 2023

 बेरोजगारी, झूठे वादों के खिलाफ नौजवान

भाजपा राज में आसमान छूती बेरोजगारी एक ना झुठलाये जाने वाला सच बन चुकी है। मोदी के रोजगार से जुडे़ वादे अब नौजवानों में कोई उत्साह पैदा नहीं कर रहे हैं। ना ही कोई लबादा इसे ढक पा रहा है। न कोई लफ्फाजी वाला भाषण नौजवानों को भरमा पा रहा है। इसकी ठोस अभिव्यक्ति, पिछले दिनों देश के अलग-अलग हिस्सों में नौजवानों के बेरोजगारी को लेकर हुए तीखे प्रदर्शन हैं। हालांकि यह तीखे प्रदर्शन कुछ ही समय में दमन, षड्यंत्रों से दबा दिये गये। लेकिन अपनी बारी में इन प्रदर्शनों ने भाजपा सरकार के होश उड़ा दिये।

 छात्र-नौजवानों की बढ़ती आत्महत्याएं और जातिगत भेदभाव

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्रों की आत्महत्या बढ़ती जा रही हैं। देश के चोटी के नामी-गिरामी सरकारी शिक्षण-संस्थानों में छात्र अपना जीवन समाप्त कर ले रहे हैं। पढ़ाई की उम्र में छात्रों की आत्महत्या शिक्षण संस्थानों और समाज के लिए चिंता का कारण है।

केंद्र सरकार ने संसद में मार्च 2023 में एक सवाल के जवाब में कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में 2018-2023 की शिक्षण अवधि के दौरान 61 छात्रों ने आत्महत्या की। यह आईआईटी में 33, एनआईटी में 24, आईआईएम में 4 छात्रों ने आत्महत्या की है।

शनिवार, 22 अप्रैल 2023

 छात्रों पर मोदी सरकार का एक और हमला

प्री मैट्रिक स्कालरशिप सीमित और एमएएनएफ बंद

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले दिनों छात्रों पर बड़ा हमला बोलते हुए एमएएनएफ (मौलाना आज़ाद नेशनल फेलोशिप) को खत्म कर दिया है। यह फेलोशिप भारत के अल्पसंख्यक समुदायों से आने वाले उन छात्रों को दी जाती थी जो यूजीसी से संबंधित विश्वविद्यालयों से शोध कर रहे थे। 2006 में आयी सच्चर कमेटी की सिफारिशों के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस फेलोशिप को मुस्लिम समुदाय से आने वाले शोधार्थियों के लिए शुरू किया था, आगामी वर्षों में इसमें बदलाव कर बाकी अल्पसंख्यक समुदायों को भी इस फेलोशिप से जोड़ दिया गया। अब 2022-23 के शैक्षिक सत्र से सरकार ने इसे खत्म करने की घोषणा कर दी है। एमएएनएफ का खत्म किया जाना, देशभर के शोधार्थियों पर किया गया बहुत बड़ा हमला है। एमएएनएफ की 30 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित थी, इसलिए इसका सबसे बुरा प्रभाव अल्पसंख्यक समुदायों से आने वाली छात्राओं पर देखने को मिलेगा। इससे मोदी सरकार के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ और ‘सबका साथ सबका विकास’ नारों की पोल खुल जाती है। मोदी सरकार का आचरण उसके नारों से बिलकुल उल्टा है।

बुधवार, 23 नवंबर 2022

 हरियाणाः105 सरकारी स्कूलों को बंद करने का आदेश

हरियाणा सरकार ने मजदूर-मेहनतकश छात्र और शिक्षक विरोधी फैसला लेते हुए 105 सरकारी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है। इस आदेश के अनुसार 3 किमी. के दायरे के उन सरकारी स्कूलों पर ताला लगा दिया जायेगा जहां छात्र संख्या 25 से कम है। इन स्कूलों को 3 किमी. के दायरे में स्थित अन्य स्कूल में विलय (मर्ज) कर दिया जायेगा। इन स्कूलों को बंद करने के लिए कम छात्र संख्या का बहाना बनाया गया है। जाहिर सी बात है कि इसका असल मकसद शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देना है। मौजूदा सरकारी स्कूलों को बंद करने और शिक्षा को निजी हाथों में सौंपने का एक अन्य प्रमाण हरियाणा सरकार ने और दिया है। इसको उन्होंने चिराग योजना का नाम दिया है। इसके अनुसार अगर छात्र सरकारी स्कूल से निजी स्कूल में प्रवेश लेता है तो सरकार उसको 500 से लेकर 1100 रुपये तक फीस के रूप में देगी।

 PET: नौकरी पाने के लिए एक और परीक्षा की बाधा

                                                                                                                                - पृथ्वी

PET: (Preliminary Eligibility Test) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य स्तरीय ग्रुप बी व ग्रुप सी के पदों पर भर्ती में बाधा पैदा करने की नयी योजना भर हैै। PET सर्टिफिकेट की मान्यता 1 वर्ष की है जिसके बाद पुनः परीक्षा देनी होगी। PET  परीक्षा देने की योग्यता कम से कम कक्षा 10 व आयु सीमा 18 से 40 वर्ष निर्धारित है। PET  शिक्षा विभाग में ज्म्ज् व ैनचमत ज्म्ज् जैसी परीक्षा है, जिसके जरिये भर्ती प्रक्रिया और कठिन बना दी गयी। 

मंगलवार, 22 नवंबर 2022

 उत्तराखंड में भर्ती घोटालों के विरोध में युवा आक्रोशित

                                                                                            -महेश

अगस्त-सितंबर माह में उत्तराखंड में भर्ती घोटाले व्यापक रूप में सामने आए। न्ज्ञैैैब् (उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग) द्वारा विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक, भ्रष्टाचार, धांधली की जांच ैज्थ् (स्पेशल टास्क फोर्स) को सौंपी गई। बाद में उत्तराखंड विजिलेंस विभाग ने भी जांच शुरू की। पुलिस दरोगा भर्ती 2015, ग्राम विकास अधिकारी भर्ती 2016, सचिवालय रक्षक और कनिष्ठ सहायक परीक्षाओं में धांधली, वन रक्षक भर्ती 2018, वन आरक्षी (फॉरेस्ट गार्ड) 2020, वन दरोगा भर्ती 2021 सहित 7 से अधिक भर्तियों की जांच चल रही है। यह जांच भी सवालों के घेरे में है। इसके अलावा उत्तराखंड सचिवालय में विधानसभा अध्यक्षों द्वारा अपने-अपने रिश्तेदारों, करीबी लोगों को नौकरी देने के आरोप लगे हैं। अभी तक 41 से अधिक गिरफ्तारियां होने के बावजूद भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। सीबीआई जांच की मांग भी प्रमुखता से उठ रही है।

गुरुवार, 10 नवंबर 2022

प्रयोगशाला इस्तेमाल का शुल्क भी अब वसूला जायेगा

                                                                                                                   -अमन भारती


दिल्ली विश्वविद्यालय में 29 अप्रैल 2022 को दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाली संस्था न्ैप्ब्.क्न् (न्दपअमतेपजल ैबपमदबम प्देजतनउमदजंजपवद ब्मदजतम) ने एक नोटिस जारी किया, जिसके तहत यह कहा गया कि आगे से विज्ञान की सभी शाखाओं में शोध के लिए इस्तेमाल होने वाले 21 तरह के उपकरणों का प्रयोग करने के लिए छात्रों को ‘मेंटेनेंस चार्ज’ देना होगा। 29 अप्रैल को ये आदेश सभी प्रयोगशालाओं के बाहर चस्पा किया गया और 1 मई से छात्रों से यह शुल्क वसूला जाने लगा। यह शुल्क एक सौ रुपए प्रति सैंपल टेसिं्टग से लेकर एक हजार रुपये एक घंटे के बीच है।

 कर्नाटक बोर्ड में पाठ्यक्रम में बदलाव

                                                                                                                -विजेयता

भाजपा शासित कर्नाटक सरकार हिजाब प्रकरण के बाद एक बार फिर अपनी हिंदुत्ववादी विचारधारा को प्रसारित करने के लिए एक और नया कदम उठा रही है।

अपने इस नए कदम के तहत कर्नाटक सरकार ने कक्षा 1 से 10 तक सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम को अपनी सांप्रदायिक और ब्राह्मणवादी विचारधारा के अनुरूप बदल दिया है। जिसका काफी विरोध किया जा रहा है और इसी विरोध के चलते कुछ अध्याय इन्हें वापस भी लगाने पड़े।

 मजदूरों के बच्चे भी संघर्ष के मैदान में

                                                                                                                         -महेश


रुद्रपुर उपश्रमायुक्त कार्यालय के बाहर मजदूरों का धरना चल रहा था। मजदूर पीछे बैठे हैं, उनके आगे महिलायें हैं और महिलाओं के साथ व उनसे आगे बच्चे हैं। मजदूरों की सभा का संचालन बच्चे कर रहेे हैं। मजदूरों व महिलाओं को बच्चे अनुशासित कर रहेे हैं। बच्चे भाषण दे रहे हैं, गीत गा रहे हैं। उपश्रमायुक्त से इंटरार्क कम्पनी को वापस खुलवाने, मजदूरों को काम पर वापस लिये जाने और रुका हुआ वेतन दिलाने की मांग कर रहे हैं। ये इंटरार्क कम्पनी के मजदूरों के बच्चों की बाल पंचायत है। मजदूरों के समर्थन में ‘‘बाल पंचायत’’। जिसका नेतृत्व 12-15 साल के बच्चे कर रहे हैं।

मंगलवार, 8 नवंबर 2022

 शिक्षा बजटः 2022-23

छात्रों-युवाओं को विष पूंजीपतियों को अमृत

इस वर्ष जब वित्त मंत्री बजट पेश कर रही थीं तो देश के छात्र कोरोना काल में पढ़ाई-लिखाई को हुए भारी नुकसान की भरपाई की उम्मीद कर रहे थे। वे उम्मीद कर रहे थे कि शायद इस बार के बजट में कोरी घोषणाआंे के स्थान पर छात्रों को कुछ हासिल होगा। विस्फोटक होती बेरोजगारी और डिजीटल विभाजन के शिकार छात्रों-युवाओं को इस बजट में कुछ राहतें मिलेंगी। परंतु छात्रों-युवाओं की आशाओं के विपरीत मोदी सरकार का यह बजट सामने आया। कुछ मामलों में यह बेशर्मी और घमंड को प्रदर्शित करने वाला बजट था। अपने बजट से मोदी सरकार ने एक बार फिर बता दिया कि वह छात्रों-युवाओं के हितों के खिलाफ है। 

CUCET;  शिक्षा में असमानता की खाई चौड़ी करने वाला प्रयोग

भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार 2014 से लगातार शिक्षा में बड़े बदलाव कर रही है। ये बदलाव दो दिशाओं में हो रहे हैं जिसमें पहली दिशा के बदलाव शिक्षा को पूंजीपतियों के हवाले कर, उनके लिए ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने और छात्रों को सस्ते मजदूरों में तब्दील करने का रास्ता खोलते हैं, वहीं दूसरी दिशा के बदलाव शिक्षा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इच्छा के अनुरूप ढालकर, संघ के संकीर्ण और फासीवादी एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं। वर्ष 2020 से पहले नरेंद्र मोदी सरकार ये सारी कोशिशें छिटपुट रूप से करती रही थी, लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ;छम्च्.2020द्ध के आने बाद से शिक्षा पर यही हमले नीतिगत रूप से और बहुत तेजी से होने शुरू हो गए हैं।

रविवार, 26 जनवरी 2020

फासीवादी हमले के खिलाफ छात्रों के एकजुट संघर्ष

देश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पास होने के बाद विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया। यह दौर आज भी जारी है। सीएए कानून अंग्रेजों द्वारा बनाये गये काले कानूनों सरीखा है। धर्म के नाम पर यह जनता को बांटता है। जनता का उत्पीड़न करने में संघी फासीवादियों से आज अंग्रेज साम्राज्यवादी भी शर्मा रहे होंगे क्योंकि संघी फासीवादियों की इन कारगुजारियों के सामने वे स्वयं को बौना महसूस कर रहे होंगे।