5 राज्यों में विधानसभा चुनाव
-कविता
5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव का माहौल इन दिनों गरम है। पान-चाय की दुकानों से लेकर टीवी-अखबारों में किसके सर ताज-किसकी हार की बहस चल रही है। राजनीतिक दल अपनी-अपनी चुनावी बिसात बिछा कर विरोधियों को परास्त करने की योजनाओं में मशगूल हैं। चुनावी रैली-दौरे, दल-बदल, वायदे-जुमलों आदि का माहौल बना हुआ है। ऐसे समय में बेहद आवश्यक हो जाता है कि संजीदगी से यह सोचा जाय कि देश के मजदूरों, किसानों, शोषित, उत्पीड़ित, वंचितों को इस चुनाव से क्या मिलने वाला है। क्या फैक्टरियों में होने वाले शोषण से मजदूरों को मुक्ति मिलेगी? क्या बर्बाद होते किसानों, बेरोजगार घूमती जवानी के जीवन में कोई फर्क पड़ेगा? यदि नहीं तो फिर इन चुनावों का देश की मजदूर-मेहनतकश आबादी से क्या लेना-देना?
