नस्लीय हिंसा का शिकार एंजेल चकमा
सुरभि
एंजेल चकमा, त्रिपुरा का एक छात्र जो अपनी पढ़ाई करने देहरादून, उत्तराखंड आया था। उसके माता-पिता ने अपने बेटे को सुंदर भविष्य की उम्मीदों के साथ देहरादून भेजा था। ना तो एंजेल चकमा अपनी पढ़ाई पूरी कर पाए और न ही उनके माता-पिता का उनके सुंदर भविष्य का सपना ही पूरा हो पाया। नस्लीय हिंसा ने उत्तराखंड में उनकी जान ले ली। अपने खिलाफ दी गई नस्लीय गालियों का विरोध करने की सजा एंजेल को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। इस हमले में उनके भाई भी घायल हुए थे। एंजेल चकमा की हत्या ने एक बार फिर नस्लीय घृणा और हिंसा के ज़ख्म को ताज़ा कर दिया है।