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शनिवार, 3 मार्च 2018

युवक

                                                                  - शहीद-ए-आजम भगत सिंह

युवावस्था मानव-जीवन का वसंत काल है। उसे पाकर मनुष्य मतवाला हो जाता है। हज़ारों बोतल का नशा छा जाता है। विधाता की दी हुई सारी शक्तियां सहस्र-धारा होकर फूट पड़ती हैं।मदांध मातंग की तरह निरंकुश, वर्षाकालीन शोणभद्र की तरह दुर्द्धर्ष, प्रलयकालीन प्रबल प्रभंजन की तरह प्रचंड, नवागत वसंत की प्रथम मल्लिका कलिका की तरह कोमल, ज्वालामुखी की तरह उच्छृंखल और भैरवी संगीत की तरह मधुर युवावस्था है। उज्ज्वल प्रभात की शोभा, स्निग्ध संध्या की छटा, शरच्चंद्रिका की माधुरी, ग्रीष्म-मध्याह्न का उत्ताप और भाद्रपदी अमावस्या की अर्द्धरात्रि की भीषणता युवावस्था में सन्निहित है।

सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

भगत सिंह और सावरकर

दो याचिकाएं जो हिंद और हिंदुत्व का अंतर बताती हैं

महान क्रांतिकारी भगत सिंह और उनके साथियों ने ब्रिटिश सरकार से कहा कि उनके साथ राजनीतिक बंदी जैसा ही व्यवहार किया जाए और फांसी देने की जगह गोलियों से भून दिया जाए। जबकि हिंदू राष्ट्रवादी सावरकर ने अपील की कि उन्हें छोड़ दिया जाए तो आजीवन क्रांति से किनारा कर लेंगे।