आलेख लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
आलेख लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 29 जून 2026


आलेख

उद्भूत गुण और जीवन 
 साधना

    धरती पर पानी इफरात है। धरती की ऊपरी सतह का दो-तिहाई से ज्यादा पानी से भरा हुआ है। इसके अलावा सतह के नीचे भी कुछ पानी है। धरती पर पानी की कुल मात्रा वही बनी हुई है पर मात्रा में वह काफी है। यह अलग बात है कि पीने योग्य पानी का संकट बढ़ता जा रहा है और कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए होगा।

गुरुवार, 4 दिसंबर 2025

विपरीतों का अंतप्र्रवेशः रूप और अंतर्वस्तु

-मनीष

    जैन पुराणकथाओं के अनुसार उनके तीर्थांकरों की लंबाई क्रमशः घटती गई है। पहले तीर्थांकर रिषभनाथ की लंबाई 1500 मीटर थी। उनके मुकाबले तेईसवीं तीर्थांकर पाश्र्वनाथ की लंबाई घटकर महज 13.5 फूट रह गई थी। चैबीसवें और अंतिम तीर्थांकर महावीर तो बस 6 फूट के थे।

आज अगर स्पिनोजा होते!

-कबीर

    स्पिनोजा ने कहा था कि ‘मन शरीर के बारे में ईश्वर का ज्ञान है।’  (Mind is God’s idea of the body)। बल्कि यह वाक्य उनके दर्शन की बुनियाद था।

रविवार, 22 सितंबर 2024

 लेनिन के जन्मदिवस ( 22 अप्रैल) के अवसर पर

भारतीय युवाओं के नाम लेनिन का पत्र  (काल्पनिक)


भारत के युवाओ!

        मैं लेनिन आपसे चंद बातें करना चाहता हूं। सबसे पहले मेरा हार्दिक अभिनंदन स्वीकार कीजिए। मुझे हमेशा से युवाओं खासकर युवा मजदूरों से बातें करने में विशेष आनंद आता रहा है।

युवावस्था की बात कुछ और ही होती है। यह अवस्था मानव जीवन के सर्वोत्तम को अभिव्यक्त करती है। आप जानते ही हो मार्क्स और एंगेल्स ने अपने क्रांतिकारी विचारों को अपनी युवावस्था में ही सूत्रित किया था। मानव जाति के इतिहास से अनेकानेक उदाहरण दिए जा सकते हैं जब महान वैज्ञानिकों, साहित्यकारों, कलाकारों ने अपना सर्वोत्तम अपनी युवावस्था में ही दिया था।

बुधवार, 23 नवंबर 2022

 हिन्दू फासीवाद के मूूल स्रोत

                                                                                                    - गुरप्रीत

यह अजीबोगरीब किंतु सत्य है कि स्वदेशी, देशभक्ति और राष्ट्रवाद का दिन-रात राग अलापने वाले संघी हिंदू फासीवादियों की विचारधारा के मूल स्रोत और वह भी ठीक इसी मुद्दे पर, विदेशी हैं। इसके स्रोत यूरोप में, खासकर जर्मनी में हैं। उस जर्मनी में जिसने इसी सोच के आधार पर नाजीवाद को जन्म दिया।

 महिलाओं की आजादी, मुक्ति और हिन्दू फासीवादी

प्रसिद्ध राजनैतिक उक्ति है कि किसी समाज की स्वतंत्रता का मापदण्ड स्त्रियों की स्वतंत्रता है। यानी कोई समाज कितना आजाद है, इसका अगर आंकलन करना हो तो यह देखना चाहिये कि उस समाज में औरतें कितनी आजाद हैं।

मंगलवार, 1 सितंबर 2020

मानवीय सम्बन्धों का जाल और सर्वश्रेष्ठ सम्बन्ध


 अक्सर ही इस बात को दोहराया जाता है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। और सामाजिक प्राणी होने के नाते प्रत्येक मनुष्य नाना प्रकार के सम्बन्धों में बंधा होता है। ये सम्बन्ध इतने नाना प्रकार के होते हैं कि कोई इन्हें गिनना शुरू करे तो वह थक जाएगा पर सम्बन्धों का सिलसिला खत्म ही नहीं होगा। मसलन हम प्रियदर्शिनी नामक एक छात्रा को लें जो बी.एस.सी.तृतीय वर्ष की छात्रा है।

प्रियदर्शिनी एक ही समय में किसी की बहन, किसी की बेटी, किसी की बुआ, किसी की मौसी, किसी की भतीजी, किसी की पोती और न जाने क्या, क्या है। और आगे के जीवन में वह न जाने किन-किन सम्बन्धों में बंधेगी। यानी प्रियदर्शिनी अपने भावी जीवन में प्रेमिका, मां, पत्नी, भाभी, ननद, दादी, नानी आदि, आदि संम्बन्धों को जियेगी।

रविवार, 26 जनवरी 2020

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-एक संक्षिप्त परिचय

(गतांक से जारी)
परचम के पिछले  अंक में हमने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उत्पत्ति, उसकी विचारधारा एवं आजादी तक की उसकी विकास यात्रा पर बात की थी। इस अंक में आजादी के बाद खासकर जनसंघ के निर्माण के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विकास यात्रा के प्रमुख पड़ावों एवं वर्तमान में उसकी स्थिति पर बात करेंगे। इसके साथ ही हम भारतीय समाज में हुए आर्थिक सामाजिक व राजनीतिक परिवर्तनों के मद्देनजर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में आये बदलावों यानी उसकी कार्यप्रणाली में आये बदलावों को भी चिन्हित करेंगे।

शनिवार, 25 जनवरी 2020

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ- एक संक्षिप्त परिचय

1925 में विजयदशमी के दिन अपनी स्थापना से लगभग 95 वर्ष बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आज पूरी दुनिया का सबसे बड़ा संगठित फासीवादी संगठन बन चुका है। 

कभी महज 12 सदस्यों की शाखा से शुरू हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की उपस्थिति देशभर में आज है। हालांकि आर.एस.एस. का स्वरूप आज भी अर्धगोपनीय व अर्द्धसैनिक संगठन का है और इसके सदस्यों का कोई आधिकारिक रिकार्ड उपलब्ध नहीं होता, तब भी यह सच है कि आज कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से उत्तरपूर्व तक आर.एस.एस. (संक्षेप में संघ) की मौजूदगी है।

गुरुवार, 26 जुलाई 2018

  इंदिरा गांधी, हिटलर और मोदी


        पिछले कुछ वक्त से इंदिरा गांधी फिर चर्चा में हैं। इंदिरा गांधी आज इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन वह फिर भी चर्चा में हैं। कभी इंदिरा गांधी को ‘‘दुर्गा“ शब्द से संबोधित करने वाले अटल बिहारी बाजपेयी की पार्टी के लोग आज फिर इंदिरा गांधी को याद करने लगे हैं। बस फर्क इतना है कि बाजपेयी ने इंदिरा की तारीफ में ये षब्द कहे तो आज के भाजपाई इंदिरा को गालियां दे रहे हैं, कोस रहे हैं। अरुण जेटली जो चुनाव हारकर भी ‘मोदी कृपा’ से वित्त मंत्री बन गए थे उन्होंने फरमाया है कि इंदिरा ‘हिटलर’ थी। पिछले 4 साल जब से भाजपा मोदी की अगुवाई में सत्ता पर पहुंची है तभी से ठीक जून का महीना आते-आते मोदी समेत भाजपाइयों की बाछें खिल जाती हैं। ये पानी पी-पी कर कांग्रेस को व कांग्रेस की नेता इंदिरा को कोसने लगते हैं। ये कहने लगते हैं कांग्रेस ‘लोकतंत्र की भक्षक है’, ‘इंदिरा गांधी तानाशाह थी’। यह सब कहकर ये फिर मक्कारी से खुद को ‘लोकतंत्र के रक्षक’ के बतौर प्रतुत करने लगते हैं। ये कहने लगते हैं कि 75 में जब इंदिरा गांधी ने तानाशाही कायम की थी तब उन्होंने इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। ये जेल गये थे । यही नहीं इन्होंने कुछ राज्यों में जहां इनकी सरकार है वहां ‘75 के आपातकाल में जेल जाने वालों’ के नाम पर विशेषकर संघियों को चिन्हित कर पेंशन देना भी शुरू कर दिया है। हालांकि  मोदी की गोद में बैठ गए नीतीश ने भी पेंशन की 2009 में शुरुआत की थी।