रविवार, 22 सितंबर 2024
शनिवार, 25 नवंबर 2023
शेर आया, शेर आया दौड़ना -सआदत हसन मंटो
ऊंचे टीले पर गडरिए का लड़का खड़ा, दूर घने जंगलों की तरफ मुँह किए चिल्ला रहा था, ‘‘शेर आया, शेर आया दौड़ना।’’ बहुत देर तक वो अपना गला फाड़ता रहा। उसकी जवाँ बुलंद आवाज बहुत देर तक फिजाओं में गूंजती रही। जब चिल्ला-चिल्ला कर उसका हलक सूख गया तो बस्ती से दो-तीन बुढ्ढे लाठियां टेकते हुए आए और गडरिए के लड़के को कान से पकड़ कर ले गए।पंचायत बुलाई गई। बस्ती के सारे अक्लमंद जमा हुए और गडरिए के लड़के का मुकदमा शुरू हुआ। फर्द-ए-जुर्म1 ये थी कि उसने गलत खबर दी और बस्ती के अमन में खलल डाला।
गुरुवार, 10 नवंबर 2022
मेंढ़कों के बीच
- सुकेश साहनी
वर्षों पहले मैंने अपने बेटे को एक कहानी सुनाई थी, जो कुछ इस तरह थीः एक बार की बात है, रात के अंधेरे में एक गाय फिसलकर नाले में जा गिरी। सुबह उसके इर्द-गिर्द बहुत से मेंढ़क जमा हो गये।
‘‘आखिर गाय नाले में गिरी कैसे?’’ उनमें से एक मेंढ़क टरटराया, हमें इस पर गहराई से विचार करना चाहिए।
‘‘मुझे तो दाल में कुछ काला लगता है’’, दूसरे ने कहा।
‘‘कुछ भी कहो.....’’ तीसरा मेंढक बोला, ‘‘अगर पुण्य कमाना हो तो इसे बाहर निकालना होगा।’’
‘‘मरने दो!’’ चौथा टर्राया, ‘‘हमारी नाक के नीचे रोज ही सैकड़ों गायें-बछड़े काटे जाते हैं, तब हम क्या कर लेते हैं?’’