मंगलवार, 30 जून 2026
सोमवार, 29 जून 2026
गुरुवार, 4 दिसंबर 2025
शनिवार, 25 नवंबर 2023
आसमान से टपका खजूर में लटका-नीतामहिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण बिल अभी तक अधर में लटका हुआ था। अब 19 सितंबर 2023 को इतने लम्बे समय बाद ये बिल पास हो गया है। इस बिल को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से जाना जाएगा। इस बिल की वैधता लागू होने के बाद 15 साल तक के लिए ही होगी। 15 साल बाद संसद इस पर पुनर्विचार करेगी।
फिस्तिीनी मुक्ति संघर्ष
फिलिस्तीन को खून में डुबोता अत्याचारी इजरायल
कंचन
7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया। इसके बाद इजरायल ने गाजा पर बर्बर हवाई हमले कर हजारों निर्दोष फिलिस्तीनियों की जानें ले ली। इन हमलों में मरने वालों की संख्या 10,000 को पार कर चुकी है, और यह लगातार बढ़ रही है। हमास के अचानक हमले से शुरू हुए इस युद्ध ने एक बार फिर इजरायल के फिलिस्तीन पर अवैध कब्जे के सवाल को विश्व राजनीति में पुनः जिन्दा कर दिया है।
मंगलवार, 25 अप्रैल 2023
पश्चिम एशिया में चीन का बढ़ता प्रभाव और दुनिया के लिये इसके मायने
अभी हाल ही में चीन की मध्यस्थता में साउदी अरब और ईरान के बीच एक समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत दोनों देश दो महीने के भीतर एक-दूसरे के यहां अपना-अपना दूतावास खोलेंगे। इसके अतिरिक्त वे इस बात पर भी सहमत हुए कि वे एक-दूसरे की प्रभुसत्ता और क्षेत्रीय अखण्डता का सम्मान करेंगे और एक-दूसरे के अन्दरूनी मामलों में दखल नहीं देंगे। ये दोनों देश लम्बे समय से एक-दूसरे के प्रति दुश्मनाना रुख रखते रहे हैं जो 2016 में दूतावासों की बन्दी तक जा पहुंचा। जहां सउदी अरब अमरीकी साम्राज्यवादियों के प्रभाव में पिछले दो दशकों से लगातार रहा है, वहीं ईरान 1979 में हुई शाह विरोधी क्रांति के बाद से अमरीकी साम्राज्यवादियों की आंख की किरकिरी रहा है। वह ईरान मंे तख्तापलट कराने की कोशिशों में उसके विरुद्ध व्यापक प्रतिबंध लगाकर आर्थिक तबाही पैदा करता रहा है। वह जनअसंतोष को भड़काने की कोशिश और साजिश करता रहा है।
शनिवार, 22 अप्रैल 2023
विश्व शक्तियों के बीच टकराव का एक अन्य क्षेत्र- आर्कटिक क्षेत्र
दुनिया के साधन स्रोतों और प्रभाव क्षेत्रों पर नियंत्रण के लिए दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच संघर्ष और टकराहटें तेज होती जा रही हैं। दुनिया के अलग-अलग क्षत्रे टकराहट के क्षेत्र बने हुए हैं। इनमें रूस-यूक्रेन युद्ध अभी सबसे तीखा है। यूक्रेन के पीछे संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में नाटो/यूरोपीय संघ और उसके समर्थक देश हैं, जबकि रूस के साथ उत्तरी कोरिया, ईरान, सीरिया, वेनेजुएला और क्यूबा जैसे देशों के अलावा चीन जैसे देश हैं। भारत, मिश्र, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील सरीखे देश किसी भी पाले में न होने की बातें कर रहे हैं। इस तीखी टकराहट का मुख्य बिन्दु यह है कि अभी तक चली आ रही दादागिरी को चुनौती देने वाले और अपने राजनीतिक, आर्थिक, सामरिक प्रभाव का विस्तार करने वाले देश रूस और चीन हैं। वे मुख्यतया अमेरिका की ताकत को, उसके वर्चस्व को चुनौती दे रहे हैं। बदले में वे अपने वर्चस्व के क्षेत्र को बनाना चाहते हैं और उसका विस्तार करना चाहते हैं। यूक्रेन की सत्ता तो मोहरा है। इस मोहरे को अमेरिकी शासक इस्तेमाल करके रूस को इस कदर उलझा करके कमजोर करना चाहते हैं कि वह अमेरिकी वर्चस्व के नीचे आ जाये। इसी प्रकार, दक्षिणी चीन सागर में आवागमन के खुले रास्ते के अधिकार के नाम पर अमेरिकी शासक एशिया प्रशांत क्षेत्र में चीन को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी नेतृत्व में यूरोपीय संघ और नाटो के देशों की संयुक्त ताकत के विरुद्ध रूस और चीन के शासक अपनी रणनीतिक साझेदारी कायम कर चुके हैं। अब यह साझेदारी विश्वव्यापी बन रही है। इस विश्वव्यापी साझेदारी में ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन, यूरेशियाई आर्थिक संघ में अन्य साझीदार शामिल हो रहे हैं। इस तरह इन दोनों प्रतिद्वन्दी गठबंधनों के बीच टकराहट अलग-अलग रूपों और स्तरों पर दुनिया के पैमाने पर चल रही है। यह लातिन अमेरिका, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और एशिया प्रशांत क्षेत्र व पूर्वी एशिया तक में चल रही है।
बुधवार, 23 नवंबर 2022
ईरानी महिलाओं का बहादुराना संघर्ष जारी है
ईरान में बीते 16 सितंबर के बाद से जनता सड़कों पर उतरी हुई है। जनता की मांगों को सुनने के बजाए ईरानी कट्टरपंथी शासकों ने भारी दमन का रास्ता चुना है। सरकार द्वारा जारी दमन में अब तक 244 आंदोलनकारियों के मारे जाने की खबर है जिसमें 32 नाबालिग भी शामिल हैं। लगभग 12,570 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया गया है। इस भारी दमन के बावजूद ईरानी जनता चैन से नहीं बैठी है और ना ही उसने शासकों को चैन से सांस लेने दी है।
लातिन अमेरिका
’’वामपंथी उभार की दूसरी लहर’’ के मायने
- मोहन
यूरोप के कई देशों में दक्षिणपंथी, धुर दक्षिणपंथी और फासिस्ट शक्तियां ताकतवर हो रही हैं और कई देशों में सत्ता में आ रही हैं, वहीं लातिन अमेरिका के कई देशों में ‘‘वामपंथी’’ या ‘‘वामपंथी रूझान रखने वाली’’ सत्ताएं आ रही हैं। इस परिघटना को पंूजीवादी प्रचार मीडिया में लातिन अमेरिका में ‘‘वामपंथी उभार की दूसरी लहर’’ घोषित किया जा रहा है। 1990 के दशक के उत्तरार्ध में ब्राजील में लूला डी सिल्वा और वेनेजुएला में ह्यूगो शावेज के सत्ता में आने के बाद की परिघटना को पहली लहर घोषित किया गया था। इस दूसरी लहर को 2017 के बाद की परिघटना बताया जा रहा है।
गुरुवार, 10 नवंबर 2022
श्रीलंका में जनसंघर्ष
जनता संघर्ष के मैदान में, इधर-उधर भागते शासक
श्रीलंका में पिछले कुछ महीनों से आर्थिक संकट के कारण जनता सड़कों पर है। श्रीलंका का यह आर्थिक संकट आगे बढ़कर राजनीतिक संकट में तब्दील हो गया है। जनता का शासकों पर से भरोसा उठ गया है। हद ये है कि जनता से डरकर देश का राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे देश छोड़कर भाग गया। अब वह अपनी अय्याशी के नये ठिकाने ढूंढ रहा है। जनता राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास में पहुंच गयी तो सेना भी जनसैलाब के आगे मूकदर्शक बनी रही। आपातकाल के सारे आदेश बेकार चले गए। जनता के विद्रोह और शासकों की भगदड़ ने दिखा दिया कि शासन के पुराने तौर-तरीके नहीं चल सकते हैं।
मंगलवार, 8 नवंबर 2022
रूसी साम्राज्यवादियों का यूक्रेन पर हमला
लम्बे समय तक युद्ध का माहौल बनाने के बाद अंततः 24 फरवरी को रूसी साम्राज्यवादियों ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया। रूसी टैंक व बमवर्षक विमान यूक्रेन को रौंदने में जुट गये। इससे तीन दिन पूर्व 21 फरवरी को रूस ने पूर्वी यूक्रेन के अलगाववादियों के नियंत्रण वाले दोनेत्स व लुशांक जन गणराज्यों को स्वतंत्र देश की मान्यता दे अपनी फौजें वहां घुसेड़ दी थी। इस हमले के साथ ही रूसी व अमेरिकी-यूरोपीय साम्राज्यवादियों की प्रभाव क्षेत्र कायम करने की होड़ का नया शिकार यूक्रेन बन गया। वैसे बीते 3 दशक से ही साम्राज्यवादियों की यह होड़ यूक्रेन को तबाह-बर्बाद कर रही थी।





