कोरोना काल और भटकते बेरोजगार
राजीव बीएससी तृतीय वर्ष का छात्र है। वह अपनी पढ़ाई के साथ छठी से 12वीं तक के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपना खर्चा निकालता है। उसके मां-बाप गांव में रहते हैं जो छोटे से जमीन के टुकड़े पर खेती करते हैं। लाकडाउन लगने के साथ राजीव का रोजगार जो छूटा वो अब तक शुरू नहीं हुआ है क्योंकि सरकार ने कोचिंग पढ़ाने की अनुमति नहीं दी है। राजीव बेरोजगार हो चुका है।
सविता एक घरेलू नौकरानी है जो दिल्ली की एक पाश कालोनी में 3-4 घरों में झाडू़-पोछा करती थी। कोरोना शुरू होते ही उसे काम से निकाल दिया गया। अब तक उसे काम नहीं मिला है। आजकल वह दूसरे काम की तलाश में है।