दिल्ली के छात्र संगठनों का मजदूर आंदोलन के समर्थन में एकजुटता बयान
देश भर में चल रहे मजदूरों के आंदोलन के दमन और बदनाम करने की कार्यवाही का हम पुरजोर विरोध करते हैं।
इस समय दिल्ली-एनसीआर से लेकर अन्य राज्यों में लाखों की संख्या में मजदूर आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन के पीछे की मुख्य चालक शक्ति मजदूरों की भयानक जीवन परिस्थितियां रही हैं। मजदूरों को दिया जाने वाला वेतन इतना कम है कि आज की महंगाई में उनका जीवनयापन भुखमरी के निकट आ चुका है। जहाँ महंगाई लगातार बढ़ रही है वहीं मजदूरों का वेतन दशकों से नहीं बढ़ा है। इसके साथ कार्यस्थल की भयानक परिस्थितियों और वहाँ होने वाले अमानवीय व्यवहार तथा इजराइल, अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते घरेलू गैस की किल्लत ने मजदूरों को और अधिक भूखे रहने पर मजबूर कर दिया है। जिसके कारण गुड़गांव-मानेसर, नोएडा, फरीदाबाद, भिवाड़ी और पानीपत सहित देश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में लाखों मजदूर न्यूनतम वेतन की बढ़ोत्तरी की मांग को लेकर सड़कों पर हैं।
इस आंदोलन को दबाने के लिए शासन-प्रशासन ने क्रूर दमनात्मक तरीके से हमला बोला हुआ है। जहाँ भोपू मीडिया इस पूरे आंदोलन को पाकिस्तानी लिंक और बाहरी उकसावे की उपज बता रहा है और अपना हक मांगते मजदूरों को उपद्रवी लिख रहा है, वहीं पुलिस बेशर्मी से मजदूरों पर लाठियाँ बरसा रही है। बिना किसी गुनाह के उन्हें जेलों में भर रही है।
9 अप्रैल 2026 को मानेसर में दमन का भयानक रूप दिखा। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मजदूरों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया। 56 मजदूरों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें 20 महिलाएं शामिल हैं। इसके बाद 12 अप्रैल को इंकलाबी मजदूर केंद्र के 6 मजदूर कार्यकर्ताओं श्यामवीर, हरीश, पिंटू, राजू, अजीत, आकाश को गिरफ्तार किया गया। उन पर हत्या के प्रयास, आगजनी और आपराधिक षड्यंत्र जैसी संगीन धाराएं लगाकर जेल भेज दिया गया। हालांकि इससे पहले 7 और 9 अप्रैल को भी पुलिस इन्हें थाने ले गई थी। जहाँ उनके फोन और व्हाट्सऐप खंगालने के बाद भी पुलिस को कुछ नहीं मिला था और उन्हें छोड़ दिया गया था।
इसी तरह नोएडा में भी पुलिस ने 13-14 अप्रैल को संगीन धाराओं में 1155 मजदूरों के साथ-साथ बिगुल मजदूर दस्ता के रूपेश, आकृति, सृष्टि, मनीषा और आदित्य आनंद को भी गिरफ्तार किया है। आज भी पुलिस द्वारा मजदूरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की धर-पकड़ जारी है।
इन आंदोलनों में महिला मजदूर हर मोर्चे पर आगे रहीं। पुलिस द्वारा उनका भी निर्मम दमन किया गया। नोएडा और मानेसर में गिरफ्तार मजदूरों में महिलाएं भी शामिल हैं। गिरफ्तारी के दौरान महिलाओं के साथ अभद्रता भी की गई। घरों में काम करने वाली महिला मजदूरों पर भी पुलिस ने लाठीचार्ज किया है।
इस जुझारू आंदोलन के बाद ही हरियाणा और यूपी सरकार ने नाममात्र की वेतन वृद्धि की। मजदूरों की न्यूनतम वेतन 30,000 और अन्य मांगों को दरकिनार कर दिया गया।
1 अप्रैल से 4 नये लेबर कोड लागू हो गए हैं जिसने मजदूरों के हितों की लड़ाई को और कमजोर करने का काम किया है। मजदूरों के शोषण को बढ़ावा देने वाला ये कानून बहुत घातक है। हम इसका विरोध करते हैं और चल रहे मजदूर आंदोलन को अपना समर्थन पेश करते हैं।
हम छात्र संगठन ये मांग करते हैं-
1. सभी गिरफ्तार मजदूरों और मजदूर कार्यकर्ताओं को तत्काल बिना शर्त रिहा किया जाए।
2. सभी फर्जी और संगीन मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं।
3. मजदूर विरोधी चार नए लेबर कानून को रद्द किया जाए। स्थाई काम पर स्थाई नियुक्ति हो, ठेका प्रथा समाप्त हो।
4. 8 घण्टे के कार्यदिवस का न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये प्रति माह घोषित किया जाए।
5. महिला मजदूरों को नाईट शिफ्ट में काम कराने का कानून रद्द करो।
6. महिला मजदूरों के उत्पीड़न निवारण के लिए प्रत्येक फैक्ट्री में कमेटी गठित की जाए और उनकी अध्यक्ष महिला मजदूर ही हो।
7. मजदूरों और महिला मजदूरों पर लाठीचार्ज करने वाले अधिकारियों, पुलिस कर्मियों पर कानूनी कार्यवाही की जाए।
AIDSO, AISA, AIRSO, COLLECTIVE, DSF, DSU, DISSC, KYS, PSA, PACHHAS, SFI
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