-सम्पादकीय
मौजूदा समाज व्यवस्था पूंजीवादी है। उसी अनुरूप मौजूदा शिक्षा व्यवस्था भी पूंजीवादी है। यह मुनाफाखोर पूंजीवादी व्यवस्था को स्थायित्व प्रदान करने का साधन है। यह समाज में शोषण-उत्पीड़त-गैर बराबरी को बनाये रखने में मददगार है। इस प्रकार मौजूदा शिक्षा व्यवस्था साररूप में मेहनतकशों के लिए शोषक-उत्पीड़क है। मेहनतकशों के लिए इस शिक्षण प्रक्रिया का उत्पीड़नकारी चरित्र सबसे ज्यादा इसकी परीक्षा प्रणाली में उभरकर सामने आता है।