मंगलवार, 30 जून 2026

हमारा कहना है

मोदी जी ! अमेरिका के आगे झुकने की कोई हद

    नरेन्द्र मोदी अक्सर 56 इंच के सीने के जुमले से भी पहचाने जाते हैं। अपने सीने की यह नाप उन्होंने खुद ही सार्वजनिक तौर पर बतायी। ‘56 इंच सीना’ आत्मसम्मान, साहस, बहादुरी का प्रतीक बन गया। लेकिन अमेरिकी साम्राज्यवादियों और उनके सरगना डोनाल्ड ट्रंप के आगे यह सीना खासतौर पर पिचक जाता है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया में भारत-चीन को ‘‘नरक’’ बताने वाली टिप्पणी शेयर की। मोदी मौन रहे। विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया में टिप्पणी को अनुचित माना पर साथ ही जोड़ दिया कि ‘‘ये भारत-अमेरिका के संबंधों की वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करती है।’’

भारत रूस से तेल खरीदेगा या नहीं खरीदेगा यह अमेरिका तय करेगा? भारत के नागरिक अमेरिका से जंजीरों में जकड़े हुए अपराधी की तरह वापस लौटाये जायेंगे। भारत-पाकिस्तान का युद्ध कब खत्म होगा, मीडिया में डोनाल्ड ट्रंप घोषणा करेगा। भारत किस देश से क्या रिश्ते रखेगा, यह अमेरिकी हस्तक्षेप से तय होगा? इससे ‘भारत-अमेरिका के संबंधों की वास्तविकता प्रतिबिंबित होती है।’

संघ हमेशा से अमेरिकी साम्राज्यवादियों का समर्थक रहा है। संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य राम माधव ने अप्रैल 2026 में अमेरिका में यह स्वीकार किया कि ‘‘भारत ने अमेरिका के कहने पर न केवल ईरान से तेल खरीदना बंद किया बल्कि रूस से तेल आयात पर भी ब्रेक लगाया।...जब भारत पहले ही इतने समझौते कर चुका है, तो आखिर अमेरिका और क्या चाहता है।’’ मार्च 2026 में अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने नई दिल्ली में कहा ‘‘भारत अच्छा एक्टर है, पहले भी पाबंदियों के हिसाब से काम किया, इसीलिए रूस से तेल खरीदने की इजाजत दी।’’ अमेरिका का प्रतिनिधि भारत में आकर रौब गांठता है, संघ-भाजपा का प्रतिनिधि अमेरिका में जाकर गिड़गिड़ाता है। भारत का स्वघोषित सबसे मजबूत प्रधानमंत्री चुप्पी साध लेता है। अमेरिका के भारत पर मनमाने टैरिफ लगाने पर प्रधानमंत्री के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। किसान ‘‘भाइयो’’ कहकर अमेरिका के कृषि मालों पर ट्रेड डील कर ली। यह ट्रेड डील भारत के मेहनतकश किसानों को दांव पर लगा कर की गयी। अमेरिका के सस्ते कृषि उत्पाद भारत के किसानों को बर्बाद कर देंगे।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने गाजा नरसंहार पर ‘‘यातना और नरसंहार’’ रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में भारत की भूमिका पर कहा गया है कि ‘‘भारत सहित कई देश हथियारों व अन्य प्रकार की सहायता देकर इजरायल की यातना व्यवस्था को बढ़ावा दे रहे थे। गाजा में चल रहे युद्ध के दौरान भी भारतीय कंपनियों ने इजरायल को ड्रोन व अन्य सैन्य उपकरणों का निर्यात जारी रखा हुआ था।’’ भारत औपचारिक तौर पर आज भी फिलिस्तीन को मान्यता देता है। हालांकि लम्बे समय से भारतीय शासकों की आवाज फिलिस्तीन के लिए धीमी होती गयी है। लेकिन मोदी के काल में तो इजरायली नरसंहार में शामिल होने की हद तक चले गये हैं। ईरान युद्ध से दो दिन पहले कि अपनी इजरायल यात्रा में नरेंद्र मोदी इजरायल ‘‘फादर लैंड’’, भारत ‘‘मदर लैंड’’ वाले बचकाने बयान देकर आते हैं।

संघ-भाजपा ‘‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’’ पर अमल करते हैं। इन्हें यह ‘‘लाठी’’ अभी अमेरिका के हाथ में दिखती है। कभी भारत के औपनिवेशिक काल में उन्हें यह ‘‘लाठी’’ ब्रिटिश साम्राज्यवादियों के पास दिखती थी। अपने पूरे गणवेश में संघी खुद लाठी धारण किये होते हैं।

संघ-भाजपा मेहनतकश जनता की कीमत पर देश में साम्राज्यवादी लूट को बढ़ाने पर आमादा हैं। वे बड़ी एकाधिकारी पूंजी के लिए मेहनतकश जनता को और भी अधिक निचोड़ने पर तुले हुए हैं। पूंजीवाद-साम्राज्यवाद की गोद में पले-बढ़े संघी फासीवादी मेहनतकश जनता के सबसे बड़े दुश्मन हैं।

साम्राज्यवाद के आगे नतमस्तक संघ-भाजपा सहित पूंजीपति वर्ग की सत्ता को खत्म करके ही मेहनतकश जनता के दिन सुधरेंगे। आज छात्रों-नौजवानों सहित मजदूर-मेहनतकश जनता का यह कर्तव्य बनता है कि वह इस लुटेरी व्यवस्था को बदलने के लिए एकजुट हों। मजदूर-मेहनतकश जनता के संघर्ष ही दुनिया को यहां तक लाये हैं। अब जरूरत है कि इतिहास का चालक यह वर्ग व्यवस्था का नेतृत्व अपने हाथ में ले। समाजवाद कायम करे।

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