फ्रांस में ‘श्रम सुधारों’ के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन
फ्रांसीसी सरकार ने फरवरी माह में रेल में नव उदारवादी सुधारों की एक नई किस्त लागू करने का फैसला लिया। 14 मार्च को प्रधानमंत्री एडुआर्डो फिलिप ने सुधार के मुख्य बिंदुओं के बारे में बताया। जिसके बाद इन सुधारों के खिलाफ रेलवे मजदूर अप्रैल माह से आंदोलनरत हैं। फ्रांसीसी ट्रेड यूनियनों ने इन नवउदारवादी सुधारों के खिलाफ 3 माह की क्रमिक राष्ट्रव्यापी हड़ताल का फैसला लिया। इन सुधारों को कठोर कटौती (आस्टिरिटी) कदमों के रूप में देखा जा रहा है। रेलवे की हड़ताल को एयरलाइंस मजदूरों व छात्रों को राष्ट्रव्यापी आंदोलन के जरिए समर्थन मिला। हड़ताल के तेवरों और व्यापकता के चलते इसकी तुलना फ्रांस की ऐतिहासिक 1968 की रेल मजदूरों की हड़ताल से की जा रही है।
फ्रांस यूरोपीय यूनियन के प्रमुख देशों में से है। उदारीकरण वैश्वीकरण निजीकरण की नव उदारवादी नीतियों को यहां 1990 से ही रेलवे में लागू किया जा रहा है। 2001 में रेल कंपनी के अवरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) को, उसके संगठनात्मक ढांचे और हिसाब-किताब से अलग कर दिया गया। जिससे अस्थाई, ठेके के जरिए नियुक्ति का रास्ता साफ किया गया। रेलवे में कम खर्च करने से रेल कंपनी पर बोझ बढ़ा। इसी क्रम में 2004, 2007, 2010 में भी सुधार किए गए जिसमें सरकारी रेल कंपनी को निजी क्षेत्र की कंपनियों से प्रतियोगिता के कदम उठाएं। लगातार कटौती कर प्रतियोगिता को निजी कंपनियों के लिए सुगम किया गया। हालिया सुधार का उद्देश्य 2020 तक प्रतियोगिता को शुरू करने का है। जिसके लिए यूरोपीय यूनियन से दिसंबर 2018 तक आर्थिक पैकेज प्राप्त होगा। इस पैकेज को पाने के लिए मैंक्रो की सरकार मजदूरों का किसी भी हद तक दमन करने पर उतारू है।
मजदूरों ने सरकार के ‘सुधार कार्यक्रमों’ के परिणामों को रेलवे के निजीकरण और मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी से पलायन बताया है। सरकारी रेल कंपनी के शेयर जारी कर सरकार उसे निजी हाथों में सौंपने की शुरुआत कर रही है। नई नियुक्तियों पर सरकार जीवन सुरक्षा और रेलवे मजदूरों के विशेष स्थल को खत्म कर रही है। इन परिणामों के प्रति सचेत हो यूनियन ने तीन माह तक पांच कार्य दिवसों में से 2 दिन हड़ताल करने का फैसला किया।
इस दौरान हुए कुछ प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हो गई। ऐसी ही एक झड़प एक मई अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर हुईं जिसमें पुलिस ने 109 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया। राष्ट्रपति मैंक्रो निजीकरण के लिए अपने सुधारों के चलते खासे बदनाम हो रहे हैं। पुलिस हिंसा के विरोध में हुए प्रदर्शनों में मैंक्रो को ‘एकतंत्रवादी’ कहा गया राष्ट्रपति मैंक्रो का कहना है कि ‘हम सुधार के अंतिम चरण में है अब हम नहीं रुक सकते’।
राष्ट्रपति मैंक्रो का कहना ‘हम नहीं रूक सकते हैं’ का मतलब यूरोपीय यूनियन के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाता है। साथ ही यह वर्तमान आर्थिक संकट के दौर में निजी पूंजी को छूट सामाजिक मदों में कटौती को भी दिखाता है। यूरोपीय यूनियन का अस्तित्व अमेरिकी वर्चस्व के इतर यूरोपीय महाद्वीप के देशों के संगठित समूह के रूप में आया था। आज लगभग यूरोपीय यूनियन के सभी देशों के शासकों के बीच एकता कायम है। परंतु देश की नीतियों के अधिक से अधिक उदारवादी होने से जनता का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। इन उदारवादी कदमों के लिए जनता यूरोपीय यूनियन को भी जिम्मेदार मानती है। इस कारण कई देशों में जनता की मांग यूरोपीय यूनियन से बाहर होने की भी बन रही है।
फ्रांस की रेलवे कर्मचारियों की क्रमिक हड़ताल से सरकार अपने निजीकरण के नव उदारवादी कदमों को पीछे लेने को तैयार नहीं है। इसका कारण साफ है कि हड़ताल इतनी आक्रामक नहीं है कि सरकार अपने कदम पीछे ले।
मौजूदा परिस्थितियां लगातार अधिक से अधिक यह साफ कर रही हैं कि हड़तालों को केवल आर्थिक मांगों तक सीमित रखकर नहीं जीता जा सकता। हड़तालों में राजनीतिक मांगों को भी प्रमुखता दिए जाने की जरूरत है। दरअसल शासक वर्ग की नीतियां भी राजनीतिक हमला ही हैं। जिसने मजदूरों की समग्र राजनीतिक-सामाजिक स्थिति को ही नीचे गिराया है। आज मजदूरों को जरूरत है कि वह अपने संघर्षों में व्यापक मजदूर-मेहनतकश जनता को एकजुट करें। इन संघर्षों का निशाना पूंजीवादी निजाम हो जो केवल और केवल पूंजीपति वर्ग का ही सेवक है।
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