एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के जरिए स्कूली शिक्षा का भगवाकरण
केंद्र में मोदी सरकार के पिछले 4 वर्ष अनेक मिसालों से भरे हुए हैं। कई कारनामों कि यह सरकार शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को भी नहीं छोड़ रही है। अपने मातृ संगठन संघ की सोच मूल्यों और विचारों को शिक्षा के जरिए स्कूली पाठ्यक्रमों में बदलाव कर अपने मंसूबे पूरे करना चाह रही है राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान एवं परिषद (एनसीईआरटी) में भारी बदलाव कर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीबीएसइ) के स्कूलों में एनसीईआरटी को अनिवार्य कर अपने अपने मनसूबे पूरे करना चाह रही है।
संघी सरकार के सत्तासीन होने के बाद पाठ्यक्रमों को अपने विचारों के हिसाब से बदलावाया गया। जिसमें हिंदुत्व की विचारधारा पर प्रकाश डालते हुए हिंदुत्व का शाब्दिक अर्थ हिंदू होना बताया गया। जिसके जनक संघ के विनायक दामोदर सावरकर ने भारतीय राष्ट्रवाद की बुनियाद रखी थी। इनकी मूल बातों में भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को पिता की भूमि मानने के अलावा अपनी पवित्र भूमि को मानना होगा। 1886 के बाद कैसे हिंदू राष्ट्रवाद ने अपनी विचारधारा में शामिल करना शुरू किया। एक मजबूत राष्ट्र केवल एकजुट राष्ट्रीय संस्कृति के आधार पर ही किया जा सकता है। इन बदलावों में 2014 के चुनाव में भाजपा की जीत से लेकर भाजपा को मुसलमान महिलाओं का पक्षधर बताया गया है।
संघ व उसके जुड़े उसके अनुशांगिक संगठन शिक्षा में बदलाव के नाम पर शिक्षा के भगवाकरण की मुहिम को तेज कर रहे हैं इन 4 वर्षों के दौरान संघ के अनुशांगिक संगठन शिक्षामंत्री अधिकारी व शिक्षाविदों के साथ बैठकें करते रहे हैं। यह पहले की भाजपा सरकार भी करती रही है। परंतु इस बार पूर्ण बहुमत की सरकार अपने मनमुताबिक बदलाव को तेजी से कर रही है। संघ के शिक्षा से जुड़े संगठन ‘शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास’ से सरकार को शिक्षा में भारी बदलाव की सिफारिशें भेजी है। जिसमें इतिहास को एक रंग में रंगने से लेकर एनसीआरटी को सुझाव दिए गए है। कि किताबों से अंग्रेजी उर्दू अरबी के शब्दों का हटाया जाए, विख्यात कवि अवतार सिंह पाश की कविता ना हो। ग़ालिब की रचना, टैगोर के विचार ना हो, ना एम. सैयद हुसैन की आत्मकथा के अंश हटाया जाए। राम मंदिर विवाद, भाजपा की हिंदुत्व राजनीति का उल्लेख और गुजरात दंगों का विवरण हटाया जाए आदि आदि।
उज्जैन में आयोजित किए गए एक अंतरराष्ट्रीय विराट गुरुकुल सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि शिक्षा में बड़े बदलाव होंगे। इसमें उन्होंने संघ को प्रेरणास्रोत बताया। वहां संघ प्रमुख मोहन भागवत के सामने मानव संसाधन राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह तो यहीं नहीं रुके इससे भी आगे पहुंचकर गुरूकुल शिक्षा पद्धति को आज के लिए प्रासंगिक बताया। बोले देश में अच्छे नागरिक के निर्माण के लिए हमें वैदिक शिक्षा प्रणाली की ओर जाना होगा। इस तरह के कार्यक्रम करके जहां भारत के उत्थान के लिए गुरुकुल की घोषणा तैयार करके ताकि गुरुकुल की शिक्षा को मुख्यधारा में शामिल किया जा सके। इससे पहले मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रमाशंकर कठेरिया को शिक्षा के भगवाकरण की जरूरत पड़ी तो वह भी किया जाएगा। इस तरह के बदलाव शिक्षा को पुरातनपंथी विचारों की ओर ले जाएंगे जहां के छात्र आधुनिक ज्ञान विज्ञान की खोज, ज्ञान की नई मंजिल और शाखाओं से दूर प्रधानमंत्री मोदी की तरह जेनेटिक साइंस और प्लास्टिक सर्जरी तो भारत में पहले से ही थी। सारा ज्ञान-विज्ञान वेदों में मौजूद है। पूरी दुनिया हमारी नकल कर रही है। देश के मुख्य पदों पर बैठे लोग इस तरह के बयान देते हैं आम छात्र भी इसी रंग में रंगे नजर आएंगे इस तरह की कवायतें शिक्षा के भगवाकरण की मुहिम को तेजी से आगे बढ़ायेगी।
इस मुहिम में राज्य की सरकारें भी पीछे नहीं है। गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व मध्य प्रदेश आदि सरकारें अपने-अपने राज्यों के बोर्ड में काफी बदलाव कर रही हैं। सघ के अपने एक राष्ट्र एक संस्कृति की सोच के तहत निजी, सीबीएससी व सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को अनिवार्य कर रही है। जो पहले से ही वैज्ञानिक ज्ञान, विज्ञान से दूर हिंदुत्व के रंग में रंगे हुए हैं। इसके अलावा बलात्कारी बाबा आसाराम जैसे बाबाओं को महान संतों की श्रेणी में शामिल किया गया। योग प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, वंदे मातरम, ध्यान को अनिवार्य किया गया। बसंत पंचमी के दिन हर सरकारी और गैर सरकारी स्कूल में सरस्वती पूजा को अनिवार्य करना, स्कूल विकास समिति हर स्कूल में बनाकर अमावस्या के दिन उसकी बैठक अनिवार्य की गई भगवत गीता को अनिवार्य बनाकर हर शनिवार को अलग-अलग कार्यक्रम रखे गए हैं। जिसमें संतों के प्रवचन से लेकर प्रश्नोत्तरी व देशभक्ति गीत और नाटक करने होंगे। संतों महात्माओं पर एक अध्याय पाठ्यक्रम में जोड़ा जाए; भाजपा के संस्थापक दीनदयाल उपाध्याय के लिखे सभी 15 खंडों के सभी संग्रहों सार्वजनिक पुस्तकालय में रखने, पौराणिक कथाओं को शमिल कर शिक्षा में सांप्रदायिक रंग देकर भगवाकरण की मुहिम चल रही है। यह मानव मानव के बीच की खाई को और अधिक चौड़ा करेगी।
संघ-भाजपा शिक्षा को धार्मिक, सांप्रदायिक नजरिए से परोस रही है। जो कि बेहद घातक परिणामों से भरी कार्रवाई है। मानव समाज के बेहतर विकास के लिए आवश्यक है कि उसकी शिक्षा वैज्ञानिक व तर्कपूर्ण हो। किंतु संघ-भाजपा इंसानों को काठ का उल्लू बनाने पर आमादा है। इसके घृणित के मंसूबों के खिलाफ वैज्ञानिक तर्कपूर्ण शिक्षा की आवाज को बुलंद किए जाने की आवश्यकता है।
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